जीवन विद्या - वैश्विक समस्याओं का सार्वभौमिक समाधान
PDF

Keywords

शिक्षा
विद्या
ज्ञान
वैश्विक समस्याएँ
भारतीय समाधान

How to Cite

जीवन विद्या - वैश्विक समस्याओं का सार्वभौमिक समाधान. (2025). Dev Sanskriti International Journal of Hindu Studies, 1(2), 22-25. https://doi.org/10.36018/dsijhs12334

Abstract

वर्तमान समय में विश्व अनेकों समस्याओं से जूझ रहा है—जैसे कि युद्धों की बढ़ती गति, हिंसा का प्रकोप, पर्यावरण संकट, नैतिकता का पतन, आतंकवाद, भ्रष्टाचार, भौतिकवाद की वृद्धि और असमानता आदि। केवल अपने को विस्तारित एवं पोषित करने की स्वार्थपूर्ण एवं संकीर्ण धारणाएँ वैश्विक समस्याओं का मूल कारण हैं। मनुष्य की विशेषता ज्ञान है। ज्ञान का अर्थ जानकारियाँ (नॉलेज) नहीं हैं, अपितु ज्ञान का अर्थ—प्रज्ञा (विज़डम) है। ज्ञान के अभाव में मनुष्य चेतन होते हुए भी नीचे दर्जे में गिना जाता है। ज्ञान के कारण मनुष्य विचारशील और मननशील बन पाता है तथा अपने स्तर को ऊँचा उठाता है। ज्ञान की दो धाराएँ हैं और दोनों को ही बढ़ाना चाहिए। पहली धारा वह है जो हमें जीविका अर्जन योग्य बनाती है—उसे शिक्षा कहते हैं। शिक्षा का मूल उद्देश्य जीविकोपार्जन और जानकारियाँ हैं। दूसरी धारा वह है जो आत्मिकता व संवेदनाओं को दर्शाती है—उसे विद्या कहते हैं। पंडित श्रीराम शर्मा जी के अनुसार विद्या को ही विवेक, अध्यात्म विद्या, ऋतम्भरा प्रज्ञा, गायत्री एवं प्रज्ञा कहा गया है। विद्या का मूल उद्देश्य उचित और अनुचित का फर्क समझकर सदैव उचित को अपनाना है। इस शोध पत्र में यह प्रतिपादित किया गया है कि वैश्विक समस्याओं का स्थायी समाधान केवल शिक्षा व तकनीकी ज्ञान से संभव नहीं, अपितु विद्या व विवेक में निहित है।

PDF

References

Brahmavarchas (Ed.). All-Inclusive Endowments of India to the Whole World – Pt. Shriram Sharma Acharya Vangmaya 35. 1st ed. Mathura, Uttar Pradesh, India: Akhand Jyoti Sansthan; 1995.

Brahmavarchas (Ed.). Education and Knowledge (Shiksha evam Vidya) – Pt. Shriram Sharma Acharya Vangmaya 49. Revised ed. Mathura, Uttar Pradesh, India: Akhand Jyoti Sansthan; 2019.

Sharma, Pt. Shriram. Problems of Today – Solutions for Tomorrow. Gayatri Tapobhumi, Mathura, India: Yug Nirman Yojna; 1997.

Creative Commons License

This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License.

Copyright (c) 2025 Guru Govind Vishwakarma, Mona Singh (Author)